Sunday, August 29, 2010

क्या शर्म आती है...

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क्या शर्म आती है...
दिल्ली में एक महिला प्रसव पीड़ा सहन करते हुए मर जाती है और किसी को शर्म नहीं आती है । सब अपने अपने काम में इतने व्यस्त होते है कि इंसानियत के लिए किसी को समय नहीं है। आज वो बेचारा बच्चा अपनी माँ को खो कर इस दुनिया में आया ऐसा नहीं है कि ऐसा और नहीं होता है पर एक वाकिया जो कि इंसानियत के हाथो में खेल बन गया और अपने आप को इन्सान कहने वाले सोच भी नहीं पाए कि उन्हें कुछ करना है.....ऐसी एक नहीं हजारो घटनाएँ है जो कि एक इन्सान को तो वाकई में सोचने पर मजबूर करती है पर क्यो कोई है मेरे साथ कदम उठाने वाला ...........

52 comments:

  1. Piyush ji aaj ka insaan insaan hai hi nahi wo to sirf robote ki tarah kam karta hai samvadan heen hai

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  2. delhi ka dil keha jani wali connaugaht place ka yeh waqa hai

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  3. desh kai dil ka yeh hal hai to baki desh ka kiya haal hoga

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  4. jaha par mahila chief minister ho waha par yeh mahila kai saath aaisa huya .

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  5. mahila mahila ki dusman hai----------

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  6. kisi party kai kisi leader ka abhi tak koie statement isko laker nahi aaya hai

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  7. woh manavdhikari keha par hai jo manavadhikar ki duhai deta hai ------

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  8. kal ki news pad kar man ma haha kar mach gaya.

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  9. वोह मर गयी और तुझ कुछ न हुआ तू दीख के चल दी

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  10. वाह रे इंसान तेरी फितरत तू ही जान

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  11. आज की ताज़ा खबर वोह मरगयी सड़क पर

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  12. kal kai akhbar main khabar full details kai saath hai

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  13. प्रसव पीड़ा से तड़पती रही महिला, गुजरते रहे लोगनई दिल्ली, जागरण संवाददाता : राजधानी की सड़क पर इंसानियत शर्मसार होती रही। प्रसव पीड़ा से तड़पती मां की गुहार अनसुनी कर लोग कनॉट प्लेस की सड़क से गुजरते रहे। महिला ने सड़क पर ही बच्चे को जन्म दे दिया। अंत में कनॉट प्लेस में बुटीक चलाने वाली एक महिला उसकी मदद के लिए आगे आई। मगर तब तक बहुत देर हो चुकी थी। अत्यधिक रक्तस्राव के कारण महिला की हालत बिगड़ चुकी थी, बच्ची तो बच गई, लेकिन 31 जुलाई को महिला की मौत हो गई। 26 जुलाई की सुबह साढ़े सात आठ बजे कनॉट प्लेस के शंकर मार्केट पर खूब चहल-पहल थी। लोग कार्यालयों के लिए बस आदि पकड़ने के लिए दौड़भाग कर रहे थे। इनमें पुरुष और महिलाएं भी शामिल थीं। इसी भागमभाग के बीच सड़क पर एक गर्भवती महिला प्रसव पीड़ा से कराह रही थी। वह हाथ उठाकर लोगों से अस्पताल पहुंचाने की गुहार लगा रही थी। मगर वहां तमाशबीन तो बहुत थे मददगार कोई नहीं। महिला ने सड़क पर ही एक बच्ची को जन्म दिया। मां बेहोश थी और उसके पास सड़क पर पड़ी नवजात बच्ची लगातार चीख रही थी। इसी बीच शंकर मार्केट में पाल साब के नाम से बुटीक चला रही रितु फ्रेडरिक को अन्नपूर्णा फूड कॉर्नर के मालिक इंद्रजीत ने इस वाकये के बारे में बताया तो वह बुटीक छोड़कर सीधे वहां पहंुचीं। पहले तो उन्हें तमाशबीनों पर गुस्सा आया और फिर उन्होंने बच्ची को उठा लिया। उन्होंने बच्ची को मां का दूध पिलवाया, लेकिन तब तक मां की हालत बेहद खराब हो चुकी थी। जिसके कारण 31 जुलाई को मां की मौत हो गई। मरने से पहले महिला ने बच्ची को रितु को सौंपते हुए कहा था कि मै इस बच्चे को आपको देती हूं। फिलहाल यह बच्ची एक एनअीजो के पास है। रितु की मां शीला फ्रेडरिक कहती हंै कि हम उस बच्ची को अपनाना चाहते हैं, मगर एनजीओ के लोग उन्हें बच्ची देने को तैयार नहीं हैं। वे कहते हैं कि बच्ची उसे मिलेगी, जिसका नाम गोद लेने वालों की सूची में सबसे ऊपर है। यही सवाल रितु को कचोट रहा है। उन्हें इस बात का बेहद दुख है कि उन्हें बच्ची से अलग किया जा रहा है।

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  14. aana jaana wala log civilized log thaa.

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  15. yeh bharat ki matrav shakti hai jo ki sadak par prasav karti hai log deekh kar muh modh leth hai

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  16. kisi ki jaan jaati hai kisi ko sharam bhee nahi aati hai--

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  17. baba tera desh main kiya aaisa hi hota rahega ---

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  18. baba abhi delhi ko aur baaris ki jarurat hai

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  19. baba yeha par kisi ko sharm nahi aati hai

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  20. sarkar isk liya ek jaach aayog betha dagi---

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  21. sarkar kisi kai dabab main nahi hai

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  22. आजकल लोगो को शर्म नहीं आती, लेकिन कुछ लोग तो है जो सच में अच्छे है .

    कुछ लिखा है, शायद आपको पसंद आये --
    (क्या आप को पता है की आपका अगला जन्म कहा होगा ?)
    http://oshotheone.blogspot.com

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  23. पठनीय !
    प्रभावी लेखन ! खूब !


    समय हो तो पढ़ें
    क्या हिंदुत्ववाद की अवधारणा ही आतंकी है !
    http://hamzabaan.blogspot.com/2010/08/blog-post_30.html

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  24. .
    बेहद शर्मनाक घटना। लोग असंवेदनशील होते जा रहे हैं॥

    बहुत सही प्रश्न उठाया आपने।
    .

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  25. खुद को इंसान कहते शर्म आती है अब..

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  26. chalo kuch logo ka dhyan to gaya

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  27. chalo kuch ko to yaad raha ki abhi insianaat baki hai

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