Saturday, November 12, 2011

सेक्स या वेश्यावृति को वैध क्यों नहीं करते

सेक्स या वेश्यावृति को वैध क्यों नहीं करते ...........
जी हाँ मेरा उन समाज और संस्कृति के ठेकेदारों से जिन्होंने सामाजिक व्यवस्था के नाम पे उस सत्य को दबाने की कोशिश की है जिसके सामने तो बड़े बड़े ऋषि मुनियों के भी व्रत भंग हो जाया जरते है , प्रश्न है की ऐसी सामाजिक व्यवस्था क्या काम की है जिसमे व्यक्ति को अपनी जान से हाथ धोना पड़ता है फिर चाहे वो शिकार हो या शिकारी हो | ये खुद भी उसी चीज़ को गलत मानने लगते है यदि ऐसी कोई घटना उनके सगे संबंधियों के साथ होती है तो ...
लडकिया भी २१ वी सदी की बात करती है तो फिर इन विषयों पर चुप कैसे रह सकती है , इसी चुप्पी के कारण किसी की बहन , माँ और बेटी के साथ नाइंसाफी हो जाती है ....
बात सिर्फ इन्सान की सोच का नहीं है , यदि बिल्ली के सामने दूध रखोगे और ये उम्मीद करो की वो नहीं पियें तो ये कहा तक जायज है

Monday, October 10, 2011

सेक्स वर्कर्स ध्यान दे

नॉएडा में जमीन अधिग्रहण मामले में PAC जवानों के खिलाफ रेप केस मामले में जवानों के खिलाफ FIR दर्ज करने की न्यूज़ को सहारा समय पर बताया गया आज दिनांक १०-१०-२०११ . मै इस मामले को शर्मसार सोचता हूँ पर ये क्या एक बात सोचने वाली नहीं है की आखिर कोई ऐसा करता क्यों है मानवीय जरूरतों को इस तरह इतना दबाया जाता है तो वो किसी न किसी विक्रति के रूप में बाहर निकलती है और मानवता को शर्मसार होना पड़ता है आखिर अगर इस चीज़ को यदि ऑप्शनल कर दिया जाएँ तो क्या कोई बुराई है
मेरी फेसबुक के माध्यम से सेक्स वर्कर्स से अपील है की अगर आप लोग कुछ कर सकते हो उन सारे लोगो के लियें जो किसी न किसी कुंठा की वजह से शर्मनाक काम कर देते है तो कृपया जरूर कुछ किजीयें क्योंकि आप जो काम करते वो तो इतना बड़ा काम है की वो तो मानवता के लियें एहसान है जो की लोगो को कुंठा भरी जिंदगी से तो बचाता है कम से कम 

Monday, March 14, 2011

भगवान की साजिश .....

भगवान की साजिश ,
जी हाँ भगवान को ये पता है की इन्सान ही वो सर्वोत्तम कृति है जो मुझे अपने अधीन कर सकता है इसलियें भगवान ने उसे अपनी माया में इतना उलझा  दिया है की वो उसमे इतना उलझा रहता है की वो उसे अनदेखा करता है जो सत्य है और उसके पीछे पड़ा रहता है जिसके पीछे भागकर कुछ समय का आनंद ले लेता है पर उसके बाद ? मंजिल मिलने पर क्या ............... दौड़ ख़त्म
इसलियें जब इन्सान असली दौड़ में दौड़ना चाहता है तो माया उसे अपनी नकली दौड़ में खीच लेती है और उसको लगता है की अरे वह मई सबसे आगे दौड़ रहा हूँ वाकई में तो भगवान उसे अपनी दौड़ में सबसे पीछे कर देता है दुनिया की शोहरत और सफलता देकर .....
समझे न भगवान की साजिश को ....

Thursday, February 17, 2011

क्या हुआ है हमारे देश के वैज्ञानिको को ..................

क्या हुआ है हमारे देश के वैज्ञानिको को ......
क्या वो एक ऐसा यन्त्र भी नहीं बना सकते जो देश में हो रही रेल दुर्घटनाओ को रोक सके ...
इसरो , केट जैसी संस्थाए भी क्या कर रही है ?  क्या ये इतना कठिन है .
मै एक छोटी सी सलाह देना चाहता हूँ की क्या ऐसे दो फ्रीक्वेंसी उपकरण भी नहीं बना सकते जो की एक ट्रेक पर आ रही दो रेलों को निश्चित दुरी पर रोक सके , इतने सारे तो रेडियो फ्रीक्वेंसी उपकरण है उनको देख के ही कोई सा नया  बना ले ......