Sunday, August 29, 2010

क्या शर्म आती है...

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क्या शर्म आती है...
दिल्ली में एक महिला प्रसव पीड़ा सहन करते हुए मर जाती है और किसी को शर्म नहीं आती है । सब अपने अपने काम में इतने व्यस्त होते है कि इंसानियत के लिए किसी को समय नहीं है। आज वो बेचारा बच्चा अपनी माँ को खो कर इस दुनिया में आया ऐसा नहीं है कि ऐसा और नहीं होता है पर एक वाकिया जो कि इंसानियत के हाथो में खेल बन गया और अपने आप को इन्सान कहने वाले सोच भी नहीं पाए कि उन्हें कुछ करना है.....ऐसी एक नहीं हजारो घटनाएँ है जो कि एक इन्सान को तो वाकई में सोचने पर मजबूर करती है पर क्यो कोई है मेरे साथ कदम उठाने वाला ...........

Monday, August 9, 2010

कोमन वेल्थ गमेस के नाम पर ये क्यो कर डाला

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जी हाँ क्या कोई शर्म महसूस करने कि जरूरत नहीं होती , मीडिया वाले एक एक बात को खोल के जनता के सामने रख रहे है इस बात का पता होने के बावजूद भी इतने घोटाले किये गए , अपने देश कि इज्जत को दाव पार लगाया गया , क्या पैसा कमाने का एक यही साधन है, उप्र में मंत्रियो को फ्री में प्लाट बाटें गएँ , ये जनता के पैसे को लूटने वाले कौन होते है ? क्या जनता के पास इतना दिमाग नहीं है कि ये उन्ही का पैसा है , दिल्ली वाले भी टैक्स क्यों दिए जा रहे है , विरोध क्यों नहीं कर रहे इसके बावजूद जब कि उनके सामने स्टेडियम कि छत टपक रही है ....................आप समझ रहे है ना....